सिरसा क्लब में लोकतंत्र 'कैद'! -जुलाई-20 में खत्म हो चुका है कार्यकाल, 17 माह से चुनाव का इंतजार

Dabwalinews
सिरसा के कुलीन वर्ग की संस्था 'सिरसा क्लबÓ में लोकतांत्रिक व्यवस्था 'कैदÓ प्रतीत हो रही है। इस संस्था की निर्वाचित कार्यकारिणी का तीन वर्ष का कार्यकाल जुलाई-2020 में समाप्त हो चुका है।पिछले 17 माह से क्लब के सदस्य संस्था के चुनाव करवाने की मांग कर रहे है। लेकिन यहां पर लोकतंत्र का गला घोंटकर पूरी कार्यकारिणी को ही विस्तार दिया गया है। बीते वर्ष कोरोना महामारी की वजह से चुनाव को टालने की बात कहीं गई, लेकिन पिछले डेढ़ वर्ष में देशभर, प्रदेश और जिला में अनेक चुनाव कार्यक्रम सम्पन्न हो चुके है। मगर, सिरसा क्लब के चुनाव को आजतक सिरे नहीं चढ़ाया गया है।अचरज की बात यह है कि सिरसा क्लब को मामूली लोगों की संस्था नहीं है। कोई अनपढ़ अथवा कमजोर लोगों की संस्था नहीं है। बल्कि इस संस्था से वकील, डाक्टर, उद्योगपति, समाजसेवी, नेता जुड़े हुए है। ऐसे-ऐसे ख्यातिप्राप्त लोग इस संस्था के सदस्य है, जोकि अपने बलबूते ही समाज में जागरूकता लाने का कार्य करते है। दूसरों को उनके हक दिलाने की लड़ाई लड़ते है। मगर, अपनी ही संस्था में लोकतंत्र को कैद किए जाने पर चुप्पी साधे हुए है। बड़े अचरज की बात तो यह है कि जिला उपायुक्त सिरसा क्लब के पदेन अध्यक्ष है। यानि किसी संस्था में यदि लोकतांत्रिक प्रणाली की बहाली नहीं हो पा रही है, तब आमजन न्याय के लिए जिसका द्वार खटखटाता है, उसकी अध्यक्षता वाली संस्था में ही लोकतंत्र खतरे में है। सिरसा क्लब के आखिरी बार चुनाव 2017 में आयोजित किए गए थे, तब कार्यकारिणी का कार्यकाल तीन वर्ष तय किया गया था। जुलाई 2020 में कार्यकाल पूरा हो गया। नियमानुसार इसके पश्चात क्लब सदस्यों द्वारा नई कार्यकारिणी का निर्वाचन किया जाना चाहिए था। चूंकि उपायुक्त इस संस्था के पदेन अध्यक्ष है, तब उन्हें ही चुनाव की घोषणा की जानी थी। मगर, उस समय कोरोना महामारी का दौर था, ऐसे में चुनाव को टाल दिया गया। क्लब सदस्यों ने भी अपनी नागरिक जिम्मेवारी समझते हुए चुनाव करवाने पर जोर नहीं दिया, मगर जब देशभर में चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई। विभिन्न प्रदेशों के विधानसभा चुनाव हुए। हाल ही में अक्टूबर में ऐलनाबाद विधानसभा के उपचुनाव भी सम्पन्न हुए। मगर, सिरसा क्लब के चुनाव पर आजतक पर्दा डाला हुआ है।
लोकतांत्रिक तरीके से कार्यकारिणी का चुनाव न होने की वजह से सिरसा क्लब में वेलफेयर गतिविधियां ठप पड़ चुकी है। भले ही सिरसा क्लब प्राइवेट संस्था है, मगर अव्यवस्था के चलते पब्लिक पैलेस बना हुआ है। मनमर्जी के रेट लिए जा रहे है। हरे पेड़ों पर आरी चला दी गई। बगैर अनुमति के निर्माण किया गया है। खर्च को लेकर भी सवालिया निशान लगे है। सिरसा क्लब के सदस्यों की ओर से अनेक बार जिला उपायुक्त से चुनाव करवाने का आग्रह भी किया जा चुका है। लेकिन क्लब सदस्यों की मांग को अनसुना कर दिया गया है। आश्चर्य इस बात को लेकर भी है कि किन्हीं कारणों से यदि चुनाव को स्थगित भी किया जाता है, तब कार्यकाल पूरा होने पर संस्था के प्रधान अथवा सचिव के कार्यकाल को विस्तार दिया जाता है। पूरी कार्यकारिणी को विस्तार कभी नहीं दिया जाता। क्लब के सदस्यों ने वर्ष 2017 में तीन वर्षों के लिए पदाधिकारियों का चयन किया था, न कि साढ़े चार वर्ष या अनंत काल के लिए। जिस प्रकार सिरसा क्लब के चुनाव को टाला जा रहा है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि इस संस्था में लोकतंत्र 'कैद' होकर रह गया है।

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