कष्ट निवारण समिति से बढ़ी आशाएं - भले ही देर से हुई मीटिंग लेकिन प्रशासनिक अमले में हलचल मचा गई

Dabwalinews.com
जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की लगभग दो वर्ष के अंतराल के बाद शुक्रवार को हुई बैठक की गूंज काफी समय तक सिरसा में सुनवाई पड़ेगी। इस बैठक ने शासन-प्रशासन के सोए हुए तारों को झंकृत करने का काम किया है। नौकरशाही में जो रूखापन और जो गैर-जिम्मेदारानापन पनप गया था, इस मीटिंग के बाद झटक गया होगा। इस मीटिंग ने सिरसा जिला ही नहीं प्रदेशवासियों को निराशा के भाव से उबारने काम किया है। लोगों को लगा कि देर है-अंधेर नहीं है। मीटिंग के आयोजन में भले ही सालों-साल का समय लग जाता है, लेकिन बहरी व्यवस्था को कान उग आते है।
आखिर कोई तो है, जो उनकी सुनता है। कोई तो ऐसा दर है, जहां उनकी सुनवाई होती है।यह संयोग है कि सिरसा जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक की अध्यक्षता का जिम्मा प्रदेश के गृहमंत्री अनिल विज को दिया गया है। वे अपने तलख तेवर के लिए विशेष पहचान रखते है। हाथों न्याय करने की उनमें अनूठी खूबी है। दर-दर भटकने वालों को अनिल विज के दरबार में ही न्याय मिल पाता है। जो व्यवस्था समस्या के समाधान में अडंगा डालती है और उसे जायज भी ठहराती है। वो व्यवस्था गृहमंत्री के समक्ष एक पल भी टिक नहीं पाती? कष्ट निवारण समिति की बैठक के माध्यम से त्वरित न्याय मिलने का रास्ता मिलता है। ऐसे में नाउम्मीद लोगों को जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक से बड़ी उम्मीदें रहती है और जब मीटिंग की अध्यक्षता गृहमंत्री अनिल विज जैसे लोग करते है, तब मीटिंग सार्थक साबित होती है।शुक्रवार को पटल पर रखी गई जिन शिकायतों को रखा गया। न केवल उन शिकायतों के सिरे चढऩे का रास्ता साफ हुआ, बल्कि अन्य विभागों में लंबित मामलों की धूल भी छंटने का रास्ता साफ हो गया। सिरसा से अंबाला के रास्ते में आने वाले शहरों, कस्बों में प्रशासनिक तंत्र सक्रिय दिखाई दिया कि न जाने कब गृहमंत्री औचक निरीक्षण करने के लिए रूक जाए। दरअसल, श्री विज प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही तय करने का कार्य करते है। यदि अधिकारी अपना कार्य सही ढंग से करें तो गृहमंत्री को कड़े फैसले लेने ही न पड़े। जब कोई अपनी जिम्मेवारी नहीं निभाएगा, दूसरों की समस्या को लटकाएगा, तब उसकी जवाबदेही तय होनी ही चाहिए। उसके खिलाफ कार्रवाई होनी ही चाहिए। लोकतंत्र में यह जरूरी भी है और श्री विज अपने फैसलों से लोकतंत्र को ही मजबूत करने का कार्य करते है। शुक्रवार की मीटिंग के बाद जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली में जहां सुधार की जरूरत है, वहां अवश्य ही कुछ सुधार होगा।

नियमित होनी चाहिए बैठक

प्रदेश सरकार की जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक के आयोजन का समय मासिक तय किया गया है। पहले नियमित रूप से मासिक बैठक होती थी। जिससे प्रशासन में सक्रियता बनी रहती। अधिकारियों को जवाबदेही की चिंता सताती रहती थी। लेकिन बैठक कई-कई माह तक लंबित रखी जाने लगी, जिससे प्रशासन में ढीलापन आ गया। अधिकारी लापरवाह की स्थिति में पहुंच गए। इसलिए सरकार को कष्ट निवारण समिति की बैठकों को नियमित रूप से आयोजित करना चाहिए, ताकि आमजन को घरद्वार पर न्याय मिल सकें और सरकार का पारदर्शी व भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने का लक्ष्य भी हासिल हो सकें।

हर सीट पर मौजूद रहें अधिकारी-कर्मचारी

गृहमंत्री अनिल विज के सिरसा आगमन का ही यह प्रभाव रहा कि शुक्रवार को दोपहर बाद गायब होने और सोमवार को देरी से ड्यूटी आने वाले भी साल के आखिरी दिन सायं 5 बजे तक अपनी सीटों पर रहें। आखिरी मिनट तक लोगों के काम निपटाए गए। कहीं कोई अड़चन नहीं, कोई बहानेबाजी नहीं। इधर फाइल आई, उधर फाइल सरकाई वाली स्थिति रहीं। लोगों को भी बड़ा अचरज हुआ, मगर विज के सिरसा में होने का प्रभाव उन्हें जल्द समझ आ गया। कुल मिलाकर गृहमंत्री का सिरसा आगमन भले ही कुछ लोगों के लिए कष्टप्रद रहा हो, मगर सिरसा की जनता के लिए बड़ी आशाएं लेकर आया।

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