अग्निहोत्र में औषद्यीय सामग्री व देसी घी डालने से शुद्ध होता है पर्यावरण : एसके आर्य

ओम् है जीवन हमारा ओम् प्राणाधार है..
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आर्य समाज की ओर से रविवार को साप्ताकि हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें संस्था संरक्षक राज कुमार गर्ग लोहेवाले ने मुख्य यजमान के तौर पर आहुतियां डाली।जबकि यज्ञब्रह्मा का दायित्व आर्य समाज के प्रचार प्रमुख विजय कुमार शास्त्री ने निभाया। इसके बाद उन्होंने वैदिक प्रार्थना पढ़ी और ''ओम् है जीवन हमारा ओम् प्राणाधार है...ÓÓ एवं ''हे प्रभु तुम शक्तिशाली हो बनाते सृष्टि को, वेद सब गाते तुम्हें कीजिए धन वृष्टि कोÓ जैसे अर्थपूर्ण भजनों से समां बांध दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वैसे तो स्वामी दयानंद सरस्वती जी का जन्म 12 फरवरी को हुआ था, लेकिन हरियाणा सरकार द्वारा उनकी जयंती 26 फरवरी को मनाई गई। इस उपलक्ष्य में सभी राजकीय व प्राईवेट स्कूलों में एक घंटे के पीरियड में स्वामी दयानंद सरस्वती जी के बलिदान, उनके द्वारा किए गए कार्यों व शिक्षाओं की विस्तृत चर्चा की गई। इस मौके अपने संबोधन में अध्यक्ष एसके आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती जी आधुनिक भारत के महान् चिंतक व समाज सुधारक थे। उन्होंने आर्य समाज की स्थापना की और समाज से अनेक कुरीतियों को मिटाते हुए भारतवर्ष की वैदिक यज्ञ परंपरा आगे बढ़ाया। आर्य ने कहा कि अग्निहोत्र में औषद्यीय सामग्री व देसी घी डालने से पर्यावरण शुद्ध होता है। अब तो विदेशी भी भारतीय वैदिक संस्कृति का अनुसरण करने लगे हैं। उन्होंने आह्वान किया कि पहले की तरह सभी लोग अपने-अपने घरों में प्रात: या सायंकाल हवन यज्ञ अवश्य करें। इस मौके कोषाध्यक्ष व सम्पत्ति अधिकारी भारत मित्र छाबड़ा, वरिष्ठ सदस्य विजय कामरा, कुलदीप पटवारी, एलआईसी के अभिकर्ता अमितराज मेहता, सुरेंद्र कुमार एलटी, अनमोल मेहता आदि मौजूद थे। शांतिपाठ के बाद प्रसाद वितरित किया गया।

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