बेसहारा गौवंश की समस्या से निजात पाने के लिए विधायक अमित सिहाग ने सरकार को दिए अहम सुझाव

Dabwalinews.com
कांग्रेस पार्टी की तरफ से बेसहारा गौवंश की समस्या से निजात पाने के लिए लाए गए गैर आधिकारिक प्रस्ताव पर हल्का डबवाली के युवा विधायक अमित सिहाग ने विधानसभा में अहम सुझाव दिए।इस विषय पर विधायक अमित सिहाग ने कहा कि बेसहारा गौवंश की समस्या से निजात पाने के लिए सरकार को एक समयबद्ध अभियान चलाने की जरूरत है।उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से सरकार द्वारा केरोसिन मुक्त हरियाणा, खुले में शौच मुक्त अभियान चलाया था ठीक उसी प्रकार से एक अभियान चला कर ही बेसहारा पशुओं से निजात पाई जा सकती है और इस अभियान को कारगर करने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियां सहयोग करेंगी।
सिहाग ने कहा कि गऊओं के लिए तो गाँव और शहरों में गौशालाएं खुली हुई हैं जो आमजन के सहयोग से चलाई जा रही हैं लेकिन बड़ी समस्या नंदिओं को लेकर है जिनके कारण अक्सर हादसे होते रहते हैं ऐसे में सरकार को प्रदेश में कमिश्नर डिवीज़न स्तर पर खुली जगहों में "नंदी धन केंद्र" नाम से नंदिशालाएं बनानी चाहिए तथा उनका खर्च स्वयं वहन करना चाहिए ताकि वो बेसहारा न घूमे और उनको खाने के लिए पर्याप्त चारा भी मिल सके।
विधायक ने सीमान्तर हल्कों का जिक्र करते हुए कहा कि नियम ये है कि कोई भी प्रदेश दूसरे प्रदेश की सीमा से 50 किलोमीटर तक पशु मंडी नहीं खोल सकता लेकिन उनके हल्के डबवाली के साथ सटे पंजाब के किललियाँवाली व मौड़ मंडी में पशु मंडी खोली हुई है जिसके चलते पशु व्योपारी पशु बेचने की आड़ में नंदिओं को छोड़ जाते है।अतः अगर हरियाणा सरकार पंजाब सरकार से इस प्रकार की मंडियों को बंद करवाने के लिए बात करे तो बेसहारा पशुओं की संख्या में कमी हो सकती है।
अमित सिहाग ने कहा कि गाँवों और शहरों में बनी गोशालाएं एवम नंदिशालाएँ, पंचायतों, सामाजिक संस्थाओं व आमजन के सहयोग से चलती हैं।उन्होंने कहा कि अगर सरकार कोई योजना बनाये और उस योजना के तहत उधोगपतियों को नंदिशालाएँ एवम गौशालाएं अडॉप्ट करने पर सरकार उन्हें टैक्स में छूट एवम अन्य कोई सहूलत का प्रावधान करे तो गोशालाओं व नंदिशालाओं में ज्यादा गोवंश को रखने और उनके चारे का अच्छा प्रबंध हो सकता है।उन्होंने कहा कि बड़े उधोगपतियों द्वारा दिये जाने वाले सीएसआर फण्ड का अगर सरकार 25 प्रतिशत पैसा, गोशालाओं व नंदिशालाओं को देने का कानून बनाए तो नंदिशालाएँ एवम गोशालाएं और विकसित हो सकती हैं।
सिहाग ने कहा कि अगर हरियाणा सरकार छत्तीसगढ़ सरकार की तरह गोशालाओं से गोबर को खरीदने लग जाये और उस गोबर को खाद आदि बनाने वाली फैक्टरियों को बेचने का काम करे तो एक तरफ जहां सरकार की आमदन में बढ़ोतरी होगी वहीं दूसरी और गोशालाएं एवम नंदिशालाएं भी आत्मनिर्भर होंगी जिसके चलते वो अधिक संख्या में गौवंश को रखने में सक्षम होंगी।
विधायक ने नंदिओं की नसबंदी के साथ साथ सींमस सेलेक्शन को और कारगर करने की दिशा में काम करने का सुझाव दिया ताकि ज्यादा मात्रा में गोऊएँ ही पैदा हों।
सिहाग ने कहा कि गांवों में हड्डारोड़ियाँ खत्म होती जा रही हैं ऐसे में बेसहारा पशुओं की मृत्यु होने पर ग्रामीणों में कई बार तनाव का माहौल भी बन जाता है।ऐसा न हो इसके लिए उन्होंने पहले भी विधानसभा में जिला स्तर पर मृत पशुओं के निस्तारण के लिए बिजली से चलने वाले मुर्दाघर बनाने का सुझाव दिया था और उसे माननीय मुख्यमंत्री द्वारा मान भी लिया गया था लेकिन अभी तक जमीनी स्तर पर उस योजना को उतारा नही गया है।सिहाग ने उपरोक्त योजना को धरातल पर लाने की मांग भी सरकार से की।
विधायक सिहाग द्वारा दिये सुझावों को विधानसभा स्पीकर द्वारा प्रशसंनीय बताया और सिहाग के उस सुझाव जिसमे गोशालाओं को उधोगपतियों को अडॉप्ट करने पर टैक्स में छूट देने की बात कही गयी थी को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए संबंधित मंत्री को रूपरेखा बनाने को कहा।

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