स्थानीय निकाय चुनाव के परिणाम घोषित,सत्तारूढ़ गठबंधन को लगा झटका,डबवाली व रानियां में इनेलो, ऐलनाबाद में कांग्रेस की जीत

Dabwalinews.com
बीती 19 जून को हुए स्थानीय निकाय चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन को भारी झटका लगा है। सिरसा जिला में डबवाली, रानियां व ऐलनाबाद में हुए चुनाव में गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा। इन चुनाव में डबवाली व रानियां में इनेलो समर्थकों ने जीत दर्ज की है, जबकि ऐलनाबाद में कांग्रेस समर्थित चेयरमैन की विजय हुई है।इस जीत के साथ ही सिरसा में विपक्ष की मजबूती और सत्तारूढ़ गठबंधन का ढीलापन सामने आया है। तीनों ही जगहों पर सत्तारूढ़ गठबंधन द्वारा चेयरमैनी हासिल करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया गया था। भाजपा व जजपा द्वारा संयुक्त रूप से अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे गए थे। भाजपा और जजपा की ओर से पूरी जोर आजमाइश भी की गई। लेकिन गठबंधन के नेता जमीनी स्तर पर लोगों का विश्वास नहीं जीत पाए और एक भी स्थान पर सत्तारूढ़ गठबंधन को चेयरमैनी नसीब नहीं हो पाई।

डबवाली साबित हुआ इनेलो का गढ़!
जिला में डबवाली नगर परिषद के चुनाव में कड़े मुकाबले की उम्मीद थी लेकिन इनेलो उम्मीदवार टेकचंद छाबड़ा रिकार्ड 1558 वोटों के अंतर से विजयी रहें।
उन्हें 9953 वोट हासिल हुए। जबकि भाजपा-जजपा के संयुक्त उम्मीदवार प्रवीण कुमार को महज 7693 वोट ही हासिल हुए और वे तीसरे स्थान पर रहें। दूसरे स्थान पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता डा. केवी सिंह व विधायक अमित सिहाग समर्थित विनोद बांसल रहें, जिन्हें 8395 वोट प्राप्त हुए। डबवाली नगर परिषद की चेयरमैनी हासिल करके इनेलो ने साबित कर दिया कि कस्बा डबवाली इनेलो का गढ़ है।


ऐलनाबाद में सोलंकी बनें सरताज
स्थानीय निकाय चुनाव में बड़ा उल्टफेर ऐलनाबाद में सामने आया। ऐलनाबाद को सिरसा जिला की हॉट सीट माना जा रहा था। चूंकि ऐलनाबाद विधानसभा से इनेलो के राष्ट्रीय महासचिव अभय चौटाला विधायक है। जबकि जजपा-भाजपा व हलोपा ने ऐलनाबाद में चेयरमैनी हासिल करने के लिए जमीन-आसमान एक किया हुआ था। मगर चुनाव परिणाम कांग्रेस समर्थित राम सिंह सोलंकी के पक्ष में रहें। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं पूर्व विधायक भरत सिंह बैनीवाल के समर्थक माने जाने वाले सोलंकी को चुनाव में 7471 वोट हासिल हुए। जबकि भाजपा-जजपा-हलोपा समर्थित राजेश कनवाडिय़ा को 7124 वोट ही हासिल हुए। इस प्रकार सोलंकी 347 वोट से विजयी रहें। इस चुनाव में इनेलो उम्मीदवार विजय अठवाल को महज 2066 वोट प्राप्त हुए और वे तीसरे स्थान पर अपनी उपस्थिति ही दर्ज करवा सकें।

रानियां में इनेलो का जलवा

रानियां नगरपालिका के चुनाव नतीजे भी रोमांचकारी रहें। बिजली मंत्री चौ. रणजीत सिंह समर्थित उम्मीदवार दीपक गाबा को सत्तारूढ़ भाजपा-जजपा व हलोपा का समर्थन प्राप्त था। उनकी आसान जीत के दावे भी किए जा रहे थे। लेकिन चुनाव में उन्हें महज 6300 वोट ही हासिल हुए और वे 818 वोटों के अंतर से पराजित हुए। चुनाव में इनेलो समर्थित मनोज सचदेवा को 7118 वोट प्राप्त हुए। इन चुनाव नतीजों ने सत्ता से जुड़े लोगों को भी झटका देने का काम किया।

नहीं चला 'आप का जादू!

भ्रष्टाचार को चुनाव मुद्दा बनाकर चुनाव मैदान में उतरने वाली आम आदमी पार्टी के लिए सिरसा जिला सूखा साबित हुआ। जिला के तीनों ही जगहों पर आप को पब्लिक का अपेक्षित रूझान प्राप्त नहीं हुआ। पार्टी के चुनाव चिह्न पर उतरे उम्मीदवारों ने केवल अपनी उपस्थिति ही दर्ज करवाई और पटल पर चौथे स्थान पर दिखाई दिए। डबवाली में आप प्रत्याशी सुमन को सर्वाधिक 1500 वोट हासिल हुए जबकि ऐलनाबाद में हरपाल को 867 तथा रानियां में राजेश को 702 वोट प्राप्त हुए।

'माननीयों को किया दरकिनार!
जिला के तीन स्थानों पर हुए चुनाव में मतदाताओं का अजब रूझान देखने को मिला। इन चुनाव में तीन विधायकों की इमेज दांव पर लगी थी। विधानसभा चुनाव में क्षेत्र के मतदाताओं ने भले ही उन्हें जीताकर भेजा, लेकिन परिषद की चेयरमैनी का चुनाव अपनी मर्जी से किया। डबवाली से अमित सिहाग कांग्रेस के विधायक है, जबकि चेयरमैनी इनेलो के पास गई। रानियां से चौ. रणजीत सिंह आजाद उम्मीदवार के रूप में विधायक बनें लेकिन चेयरमैनी इनेलो समर्थित के पास गई। इसी प्रकार ऐलनाबाद से चौ. अभय सिंह चौटाला इनेलो के विधायक है, लेकिन चेयरमैनी कांग्रेस समर्थित के सिर पर सजीं।

प्रोपर्टी आईडी की परेशानी भी बनी वजह

स्थानीय निकाय के चुनाव में वैसे तो विभिन्न मुद्दे रहें लेकिन आमजन को सर्वाधिक जिसने परेशान किया, वह प्रोपर्टी आईडी का रहा। जिलाभर में नगर परिषद व नगरपालिकाओं द्वारा गलत प्रोपर्टी सर्वे नोटिस दिए गए। जिनमें अनेक खामियां थी। लोगों को इन खामियों को दूर करवाने के लिए परिषद/पालिका के चक्कर लगाने पड़े। जिस प्राइवेट एजेंसी ने लाखों रुपये लेकर सर्वे किया, उसे ब्लैक लिस्ट करने में आनाकानी की गई। लोगों को ही एजेंसी की गलती को सुधारने के लिए विवश किया गया। प्रोपर्टी आईडी में खामियों की वजह से ही आज भी लोग विकास शुल्क जमा करवाने और एनओसी के लिए नगर परिषद/पालिकाओं के चक्कर लगाने को मजबूर है।

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