शिक्षा की वर्तमान स्थिति: एक गंभीर मुद्दा,नई शिक्षा नीति का मूल्यांकन और सुधार की जरूरत: आचार्य रमेश सचदेवा

**देश में शिक्षा की दिशा और दशा पर गहन विचार की आवश्यकता**

देश की शिक्षा व्यवस्था की वर्तमान स्थिति एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है। आचार्य रमेश सचदेवा, शिक्षाविद और मोटिवेशनल स्पीकर, ने इस मुद्दे पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा प्रणाली लाखों युवाओं को बेरोजगार बना रही है, क्योंकि यह उन्हें आवश्यक कौशल प्रदान नहीं कर रही।

**शिक्षा और कौशल की आवश्यकता**

आचार्य रमेश ने कहा कि यदि हम 1.4 अरब लोगों को शिक्षित करना चाहते हैं, तो हमें शिक्षा के प्रति अपने दृष्टिकोण में बदलाव लाना होगा। देश की 50 फीसदी से अधिक आबादी 30 साल से कम उम्र की है, जिन्हें कौशल सिखाना अत्यंत आवश्यक है। युवाओं को किसी हुनर में निपुण बनाने के बिना, हम देश को बर्बादी की ओर ले जा रहे हैं।

**वर्तमान शिक्षा नीति की खामियां**

आचार्य रमेश ने नई शिक्षा नीति 2020 की आलोचना करते हुए कहा कि यह नीति विदेशी नीतियों की नकल मात्र है, जो भारतीय संदर्भ में प्रभावी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत, बच्चों को स्कूल तो भेजा जा रहा है, लेकिन वे न तो ठीक से पढ़-लिख सकते हैं और न ही गणित के बुनियादी सवाल हल कर सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप, वे न तो शारीरिक रूप से श्रम कर सकते हैं और न ही किसी अन्य व्यावहारिक कार्य में निपुण हो सकते हैं।

**कौशल आधारित शिक्षा की मांग**

आचार्य रमेश का मानना है कि हमें एक व्यावहारिक शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है, जहां बच्चों को पारंपरिक कार्यों में प्रशिक्षण दिया जाए और साथ ही वैज्ञानिक ज्ञान भी प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि हम बच्चों को केवल डिग्रियां देंगे और उन्हें हुनर नहीं सिखाएंगे, तो इससे देश की आर्थिक प्रगति में बाधा आएगी।

**कानून और वास्तविकता का अंतर**

उन्होंने कहा कि वर्तमान में, हम कानून तो बना रहे हैं, लेकिन उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने की क्षमता नहीं रखते। हमें यह समझना होगा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य क्या है और इसके लिए किस प्रकार की नीतियों की आवश्यकता है।

आखिरकार, आचार्य रमेश ने इस बात पर जोर दिया कि हमें शिक्षा और कौशल के स्तर पर एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, जिससे देश के युवा न केवल शिक्षित हों, बल्कि हुनरमंद भी बनें। इससे ही हम एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर सकेंगे।

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