भारत में भी है एक कोरिया: आओ जानें
भारत में कोरिया यह बात हर किसी को आचंभित कर देती है। यह स्था है भारत के छत्तीसगढ़ राज्य का कोरिया जिला। भारत के इस कोरिया जिले के बारे में जानकारी से न केवल आपके सामान्य ज्ञान में वर्द्धन होगा अपितु आप इस स्थान के भ्रमण के वारे में अवश्य सोचेंगे। तो आओ आपको कोरिया लिए चलते हूँ।कोरिया छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तर-पश्चिम ज़िलो में से एक है। जिला मध्य प्रदेश राज्य में 25 मई 1998 को अस्तित्व में आया। इसका मूल जिला सरगुजा था। 1 नवम्बर 2000 को छत्तीसगढ़ के नए राज्य के गठन के बाद, यह जिला छत्तीसगढ़ राज्य के अंतर्गत आने लगा है। जिला कोरिया का नाम यहाँ के पूर्व रियासत कोरिया से लिया गया है।
छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तर-पश्चिम में बसा कोरिया जिला, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। जिले से होकर कई नदियां बहती हैं, जिनमें से कई का उद्गम स्थल भी यहीं है। 25 मई 1998 को ये जिला अस्तित्व में आया। कोरिया पहले सरगुजा जिले का ही एक हिस्सा था, लेकिन बाद में इसे एक अलग जिला बनाया गया। इस जिले का नाम पूर्व रियासत कोरिया के नाम पर पड़ा है। यहाँ गुरुघासी दास राष्ट्रीय उद्यान है, जो इस जिले की पहचान भी है। साथ ही कोरिया रियासत के राजा का महल आज भी यहाँ है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग यहाँ पहुंचते हैं। कोरिया एक आदिवासी बहुल जिला है। कोल, गोंड, गड़ेरी (गड़रिया) जैसी जनजातियां यहां निवास करती हैं। कोरिया में बहुत ही दार्शनिक स्थल हैं जिनमें से निम्न विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हैं।
गुरुघासी दास राष्ट्रीय उद्यान
गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना साल 2001 में हुई थी। इसके पहले ये संजय राष्ट्रीय उद्यान का हिस्सा था। करीब 1440। 705 वर्ग कि. मी। में फैले इस उद्यान में बाघ, तेंदुआ, नीलगाय, चीतल जैसे ढेरों जानवरों का घर है। इस उद्यान से हसदेव, गोपद और अरपा नदी बहती है, अरपा का उद्गम इस उद्यान के अंदर ही है।
वहीं गोपद का उद्गम जिले के सोनहत में हैं। उद्यान की प्राकृतिक सुंदरता को देखने दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान को छत्तीसगढ़ का चौथा और भारत का 53वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है।
‘कोरिया महल' कोरिया महल, बैकुंठपुर में स्थित है। इस महल को बनाने का काम 1923 में शुरू हुआ था। मुगल और राजस्थानी शैली के इसके किलो की नक्काशी की गई। इस महल में कई सारे कमरे हैं और दो प्रांगण है। महल के मुख्य द्वार पर एक तोप रखा हुआ है, जिसका इतिहास 300 साल पुराना है।
बेहद मशहूर गौरघाट वॉटरफॉल : गौरघाट वॉटरफॉल, जिला मुख्यालय बैकुंठपुर से करीब 43 किलोमीटर की दूरी पर है। 60 फीट की ऊंचाई से गिरता पानी और आस-पास की हरियाली देखने यहां दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस वॉटरफॉल के जल कुंड में गौर पशु आराम किया करते थे, इसी वजह से इसका नाम गौरघाट पड़ा।
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की प्रसिद्धि का मुख्य कारण यहाँ इसकी प्राकृतिक सुंदरता है। वहीं सबसे मुख्य है इस जिले में पाया जाने वाला दहीमन वृक्ष जोकि किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है।
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में पाया जाने वाला यह दहीमन वृक्ष किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। इस मामूली से दिखने वाले वृक्ष की कई खासियतें हैं। इस पेड़ के फायदे के बारे में सुनकर तो आप शायद सोच रहे होंगे कि यह सब बातें काल्पनिक होंगी, लेकिन यही सच है। जानकारी के अनुसार
इस पेड़ की पत्तियां कैंसर, ब्लड प्रेशर, पीलिया और मानसिक रूप से पीड़ित लोगों के लिये ये पेड़ संजीवनी का काम करता है। इस पेड़ के पत्तों की एक खासियत ये भी है कि इस पर अगर आप कुछ लिखेंगे तो उसके अक्षर उभरकर आएंगे। इसके पीछे यह भी कहा जाता है कि आदि काल में गुप्तचरों द्वारा इस पत्ते पर लिखकर संदेशों का आदान-प्रदान किया जाता था, जिसे आप प्रत्यक्ष रूप से देख भी सकते हैं।
वन विभाग के अधिकारी भी इस बात को पूरी तरह जानते हैं और इसके संरक्षण का उपाय भी विभाग द्वारा किया जा रहा है। सबसे खास बात तो यह है कि राज्य के पूर्व वित्त मंत्री रामचन्द्र सिंह देव द्वारा इस वृक्ष के पौधों को संसद भवन दिल्ली तक भेजा गया है।
कोरिया जिले में इस दुर्लभ प्रजाति के पौधों को अभी तक कई लोग पूरी तरह से वाकिफ नहीं है। इसलिए यह वृक्ष अभी बचे हुए हैं। व्यापक प्रचार-प्रसार भी विभाग द्वारा इसलिए नहीं किया जाता कि लोगों के द्वारा इस वृक्ष को कोई नुकसान न पहुंचाया जाए।
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