मनुष्य जीवन बहुत छोटा होता है, इसे व्यर्थ में नहीं गंवाना चाहिए: आचार्य राधेशानन्द
डबवाली-जन्माष्टमी महोत्सव के तहत बिश्नोई धर्मशाला में चल रही श्री शब्दवाणी हरि कथा के दूसरे दिन आचार्य राधेशानन्द जी ने दीप प्रज्ज्वलित व गुरु जंभेश्वर भगवान के चित्र पर पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद लिया बिश्नोई सभा डबवाली के सचिव इन्द्रजीत बिश्नोई ने कथा वाचक आचार्य राधेशानन्द व स्वामी विवेकानंद को तिलक कर उनका स्वागत किया। बिश्नोई सभा डबवाली के सदस्य जीत राम पूनिया, सदस्य रामकुमार तरड, जंडवाला बिश्नोईया के बिश्नोई मन्दिर के पूर्व अध्यक्ष जगदीश सीगड, अमीलाल पटवारी, कृष्ण कुमार लोहमरोड ने संतों व संगीत मण्डली का तिलक कर स्वागत किया।
कथा के दौरान आचार्य राधेशानन्द ने बताया कि गुरु महाराज जम्भेश्वर भगवान द्वारा उच्चरित वाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान कहते हैं- हरि ककेडी मण्डप मेडी जहां हमारा बासा चार चक नव द्वीप थरहरे जो आपु प्रकासो अर्थात महल आदि में न होकर मेरा वास हरी कंकेहडी के नीचे है, मैं हमेशा वनस्पति पेड़ पौधों के नीचे रहता हूं, मैं हमेशा प्रकृति व जीव जन्तुओं से प्रेम करता हूं, इनके बिना मनुष्य जीवन संभव नहीं है, इसलिए प्रकृति से प्रेम करना चाहिए क्योंकि पेड़ पौधों से हमें प्राणवायु मिलती है। इसलिए पेड़ पौधों को न काटकर ज्यादा से ज्यादा लगाने चाहिए। लावो ले लो रे भक्ति को अवसर मिले न बारम्बार अर्थात सत्संग सुनकर भक्ति का आन्नद ले लो अवसर बार बार नहीं मिलेगा, इसलिए भगवान का भजन करना चाहिए। मनुष्य जीवन बहुत छोटा होता है व्यर्थ में नहीं गंवाना चाहिए। जागो जोवो जोत न खोवो छल जासी संसारू अर्थात जगने का समय है जागते हुए बेशकीमती समय को गंवाना नहीं चाहिए, भगवान का भजन करना चाहिए। उन्होंने मेरा मालिक राजी चाहिए ,चाहे जगत रूठ जाए सारा भजन सुनाते हुए कीर्तन भी किया। सभा सदस्य रणवीर सहारण ने आरती करवाई। आज का हलवे का प्रसाद स्व चौ रणजीत राम जादूदा परिवार अबूबशहर की तरफ से सभी को वितरित किया गया।
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