महान क्रांतिकारी शिव राम राजगुरु की 116वीं जयंती पर उन्हें याद किया

डबवाली स्थानीय शहीदी चौक में स्थापित शहीद-ए-आजम स. भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शहर की विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने शिव राम राजगुरु की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए उन द्वारा गुलाम भारत को आजाद करवाने के लिए की गई कुर्बानी को भारतीय इतिहास का गौरव बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे शहीदों की बदौलत ही भारत के इतिहास की गौरवशाली पहचान है। अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन पंजाब प्रदेश के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंगला ने कहा कि शिवराम राजगुरु ने बहुत कम उम्र में ब्रिटिश सरकार की रातों की नींद उड़ा दी थी और उनके लिए बड़ा खतरा बन गए थे। ब्रिटिश सरकार केे असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस जॉन सॉन्डर्स के कत्ल के आरोप में राजगुरु को महज 22 वर्ष की उम्र में फांसी दे दी गई थी। उनकी शहादत को सदैव याद रखा जाएगा।

भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री विजय वधवा ने कहा कि आज राजगुरु की 116वीं जयंती है, उनका जन्म 24 अगस्त 1908 को खेड़, वर्तमान में महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम हरिनारायण राजगुरु और माता का नाम पार्वती देवी था। शिवराम राजगुरु को ब्रिटिश सरकार में असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस जॉन सॉन्डर्स के कत्ल के लिए भगतसिंह और सुखदेव के साथ 23 मार्च 1931 को लाहौर की जेल में फांसी दे दी गई थी। देश के लिए सर्वस्व बलिदान करने वाले ऐसे शहीदों को बार-बार नमन है। श्री गौशाला प्रबंधक कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शाम लाल जिंदल गंगा ने कहा कि लेकिन जब पूरे भारत में जॉन सॉन्डर्स की मौत का जश्न मनाया जा रहा था तब उन्हें एक ही गोली से ढेर करने वाले राजगुरु बेहद उदास थे, वे सॉन्डर्स के परिवार और अनाथ हुए बच्चों के बारे में सोच रहे थे।
इस अवसर पर रिटायर्ड कर्मचारी संघ के ब्लॉक प्रधान सुखवंत सिंह चीमा, हरजीत सिंह टीटी सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने उपस्थित होकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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