स्वर्ण मंदिर, वाघा बॉर्डर और जलियांवाला बाग का ऐतिहासिक भ्रमण रहा अविस्मरणीय
इन्कलाब इंटरनेशनल ट्रस्ट द्वारा संचालित ग्रीन वैली इंस्टीट्यूशन, मट्टदादू के स्टाफ और विद्यार्थियों के 38 सदस्यीय दल ने दो दिवसीय ऐतिहासिक और शिक्षाप्रद भ्रमण किया। इस यात्रा में दल ने जलियांवाला बाग, वाघा बॉर्डर, बंटवारा संग्रहालय, श्री स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब) अमृतसर और श्री दरबार साहिब तरन तारन जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का दौरा किया। यह यात्रा विद्यार्थियों के लिए बेहद यादगार और ज्ञानवर्धक रही।
विद्यार्थियों ने उन स्थानों का साक्षात अनुभव किया, जिनके बारे में वे केवल किताबों में पढ़ते थे। वाघा बॉर्डर पर उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमा पर दोनों देशों की परेड और झंडा उतारने की रस्म देखी, जिससे उनमें देशप्रेम और देशभक्ति का भाव प्रबल हो गया। जलियांवाला बाग में अमर ज्योति, शहीदों की स्मारक, गोलियों के निशान और कुएं को देखकर बच्चे भावुक हो गए।
स्वर्ण मंदिर की यात्रा में उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी लंगर सेवा और मानवता की सेवा भावना को नजदीक से देखा, जिससे वे बेहद प्रभावित हुए। इसके अलावा, श्री दरबार साहिब तरन तारन में सबसे बड़े सरोवर का दृश्य भी उनके लिए खुशी का कारण बना।
दल के संचालक हरदीप सिंह मट्टदादू ने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों से रूबरू कराना था। 38 सदस्यीय दल में 25 विद्यार्थी, 8 अध्यापक, 2 अभिभावक और 3 चालक शामिल थे। उन्होंने इस यात्रा को एक अद्भुत अनुभव बताया, जिसमें सभी ने मिलकर नई जानकारियां प्राप्त कीं और इस ऐतिहासिक यात्रा का आनंद लिया।
इस दल में शामिल प्रमुख विद्यार्थी थे चैरुब, अरमान, ऐलममीप, नवदीप, खुशवीर, गुरप्रीत, देविका, जश्न, गौतम, समर, अनमोल, वंशदीप, जीवा, मानवी, जसमीन, नवरीत, करणजोत और हरजोत। साथ ही शिक्षकों में हरमीत धालीवाल, राम प्रताप, मनजीत शर्मा, पूजा वर्मा, नूरप्रीत, सुनिता वर्मा और पिंकी शामिल थे। चालकों में गुरबाज, कुंदन, रोहतास और मांगेराम रहे।
यह यात्रा विद्यार्थियों के लिए न केवल शैक्षणिक थी, बल्कि यह उनके भीतर देशभक्ति और सेवा भावना को भी जागृत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम साबित हुई।
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