समालखा में 16, 17 और 18 नवंबर को होगा संत निरंकारी मिशन का 77वां अंतर्राष्ट्रीय वार्षिक निरंकारी संत समागम
डबवाली
संत निरंकारी मिशन का 77वां अंतर्राष्ट्रीय वार्षिक निरंकारी संत समागम संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा में 16, 17 और 18 नवंबर को होगा। यह आध्यात्मिक संत समागम सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन सानिध्य में भव्यता पूर्ण आयोजित होने जा रहा है। इस तीन दिवसीय संत समागम के पश्चात 19 नवंबर को गुरु वंदना समारोह आयोजित किया जाएगा। सामूहिक विवाह समारोह 21 नवंबर को होगा। इस पूरे आयोजन को लेकर डबवाली इलाके की निरंकारी साध संगत में उत्साह का माहौल है।
यह जानकारी देते हुए निरंकारी साध संगत चौटाला के मुखी डा. राजेंद्र यादव ने बताया कि 77वें वार्षिक निरंकारी संत समागम में शामिल होने वाले सभी श्रद्धालुओं को अधिक से अधिक सुख सुविधाएं प्रदान करने के लिए शामियानों की एक सुंदर नगरी स्थापित की गई है। जिसमें भक्तों के ठहरने, जलपान एवं उनकी मूलभूत सुविधाओं का उचित प्रबंध निरंकारी मिशन द्वारा प्रशासन के सहयोग से किया गया है। समागम स्थल पर विभिन्न प्रबंधन कार्यालय, प्रकाशन स्टाल, प्रदर्शनी, लंगर, कैंटीन एवं डिस्पेंसरी की सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। यातायात प्रबंधन के अंतर्गत इस वर्ष भी रेलवे स्टेशन, बस अड्डे एवं हवाई अड्डे से समागम में पहुंचने वाले सभी श्रद्धालुओं को लाने एवं ले जाने की उचित व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही अन्य वाहनों के लिए पार्किंग क्षेत्रों की भी व्यवस्था की जा रही है। यह दिव्य संत समागम अनेकता में एकता का अनुपम दृश्य प्रदर्शित करेगा। समागम में देश, विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु एंव भक्तगण सम्मिलित होंगे।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष समागम का विषय 'विस्तार... असीम की ओर' है, जिस पर देश, विदेशों से सम्मिलित हुए गीतकार, वक्तागण अपने शुभ भावों को कविताओं, गीतों एवं विचारों के माध्यम से व्यक्त करेंगे और विभिन्न भाषाओं में दी गई इन प्रस्तुतियों का आनंद सभी श्रोतागण प्राप्त करेंगे। यह दिव्य संत समागम शांति, समरसता, विश्वबंधुत्व और मानवीय गुणों का एक ऐसा सुंदर प्रतीक है जिसका एकमात्र लक्ष्य 'एकत्व में सदभाव' तथा शांति की भावना को प्रदर्शित करना है। यह संत समागम निरंकारी मिशन द्वारा दिये जा रहे सत्य, प्रेम और शान्ति के दिव्य संदेश को जन-जन तक पहुंचाने हेतु एक ऐसा सशक्त माध्यम हैं जो आध्यात्मिक जागरूकता के माध्यम से समूचे संसार में समानता, सौहार्द्र एवं प्रेम का सुंदर स्वरूप प्रदर्शित कर रहा है। वर्तमान समय में जिसकी नितांत आवश्यकता भी है।
उन्होंने बताया कि संत निरंकारी मिशन का पहला समागम सन् 1948 में मिशन के प्रथम गुरू बाबा बूटा सिंह जी के नेतृत्व में दिल्ली के पहाड़गंज में हुआ। उसके उपरांत बाबा अवतार सिंह जी ने अपने प्रेम से संत समागम की श्रृंखला को गति प्रदान की। तदोपरांत बाबा गुरबचन सिंह जी ने सहनशीलता और नम्रता जैसे दिव्य गुणों द्वारा इसका ओर अधिक रूप में विस्तारण किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन दिव्य मानवीय मूल्यों को ख्याति प्रदान करवाने में बाबा हरदेव सिंह जी ने अपना अहम् योगदान दिया जिसके परिणामस्वरूप आज देश विदेश में मिशन की लगभग 3,485 शाखाएं है। आध्यात्मिकता की इस पावन ज्योति को जन जन तक पहुंचाने के लिए सतगुरु माता सविन्दर हरदेव जी ने भी अथक प्रयास किए और अपने कर्तव्यों को बखूबी रूप में निभाया। वर्तमान में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ब्रह्मज्ञान की इस दिव्य रोशनी को विश्व के प्रत्येक कोने में एक नई ऊर्जा के साथ संचारित कर रहे हैं।
डा. राजेंद्र यादव ने डबवाली इलाके के साथ पूरे जिला सिरसा के लोगों को उपरोक्त कार्यक्रम अनुसार अधिक से अधिक संख्या में समालखा पहुंच कर आध्यात्मिक लाभ उठाने का आह्वान किया है।
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